दीपोत्सव

 

 

सजा धजा साकेत निहारेदीपोत्सव

कब आयेगें राम ?

अट्टहास कर रहा है रावण

कौन दिलाये त्राण ?

गहन अमावस घिर आया है

आशा दीप जलाओ

बंद करो अब रुदन अमंगल

मंगल ध्वनि बजाओ

अंतस तम से बंधमुक्त हो

प्रज्ञा दीप सजाओ

श्री समृद्धि के स्वागत को

स्व सामर्थ्य जगाओ

दीपपर्व की मंगल वेला

सब सामोद मनाओ 

 

 

 

दीपोत्सव

 

दीपवलय सज्जित हैं  दीपोत्सव

रंगोली द्वार  है

अमावास की यामिनी ने

किया सुश्रृंगार है

प्रज्ज्वलित मालिका है

उमंग अपार है

आया फिर दीपपर्व

मंगल त्योहार  है

ऋद्धि सिद्धि मिलें सदा

 विनती बारम्बार है

समृद्धि अक्षय हो 

यही उदगार है……..