कदाचित

 

परिवेश की पुनरावृतिकदाचित

सन्दर्भों का संचयन

स्मित निर्निमेष अशेष

विस्मृतियों का विवेचन

जिजीविषा की विवशता

निवर्तित संबंधों का निर्वहन

अदृश्य अस्मिता का आकलन

शून्य का संभरण

तन्द्रा कोई क्षिप्त

शुष्क स्नेह सिक्त

प्रस्थान की प्रतीक्षा

मोक्ष नहीं दीक्षा

पुनः पुनः प्रयास

प्राण का आभास

संवरण निस्तरण

कदाचित यही जीवन ….