भारत महान है ?

 

नैतिकता नतमस्तक

सत्य पड़ा मसान हैभारत महान है

लाज दे रही दुहाई

भारत महान है ?

मर्यादा मृतप्राय

अचेत संविधान है

नेतृत्व नोच रहा

भारत महान है ?

मातृत्व मौन हुई

देवी निष्प्राण है

लालायित लालसा है

भारत महान है ?

भटकन है पीड़ा है

व्यथित नौजवान है

फंदे पर झूल रहा

भारत महान है ?

फाइलों पर बहती है

सूखा किसान है

ऋण में है डूब रहा

भारत महान है ?

चोर साहूकार बना

साधू शैतान है

पुण्य पर्व हुआ अस्त

भारत महान है ?

भस्मासुर

 

जनता के सेवक सत्ता पाते ही खुदा हो जाते हैं

सरोकारों की कौन कहे ,जनता से ही जुदा हो जाते हैं

आम आदमी से बना लेते हैं दूरी

इनके मुँह में है राम ,बगल में छुरी

परिभाषाएँ रातों रात बदल जाती हैं

देश की अर्थव्यवस्था गिरती है ,इनकी संभल जाती है

वादों और इरादों की बरसात करते हैं

पांचसितारा लंच के बाद भुखमरी की बात करते हैं

भ्रष्टाचार का भस्मासुर भारत से उस दिन भाग जायेगा  

समाज का अंतिम आदमी नींद से जिस दिन जाग जायेगा ………  

तेल का खेल

 

तेल देखो ,मत तेल की धार देखो

जेब कैसे काटती है सरकार देखो

नेताओं को तेल कितना भी लगाये जनता

पीठ पीछे करते हैं ये वार देखो

तेल तो निकाला जायेगा तिलों से ही

आम आदमी से ये कैसा सरोकार देखो

तेल की चिंता में जनता रात रात भर जागेगी

अस्मिता को तलाशती जिंदगी कैसे भागेगी

न नौ मन तेल होगा ,न राधा नाचेगी  ……….  

 

बहाना

 

जब आमदनी अठन्नी ,खर्चा हो रुपैया

तो तुम्हीं बताओ क्या हाल होगा भैया

कहाँ से मिल पायेगा सबको पूरा माल

नतीजा तो निकलेगा ही ठन ठन गोपाल

रोज बढ़ती महंगाई नए घोटाले और भ्रष्टाचार

देश की दशा और दिशा का कर रही है बंटाधार 

पेट्रोल का दाम बढ़ाना तो एक बहाना है

वो तो “कल्याण योजनाओं” के लिए फंड जुटाना है

रोम में लगे आग तो लगे, कौन बुझायेगा ?

वो नेता ही क्या जो चैन की वंशी नहीं बजायेगा !

भ्रष्टाचार

 

 

जैसे अधिक जोगियों के जमा हो जाने से

बड़े से बड़ा मठ भी हो जाता है उजाड़ ,वैसे ही

जो सरकार में अर्थशास्त्रीयों की हो जाय भरमार

तो देश की अर्थव्यवस्था का होता रहेगा बंटाधार

जब सरकार चलायेगें विशेषज्ञ और सलाहकार, और

खादी और खाकी की सहमति से पलेगा भ्रष्टाचार

घोटालों के लिए फंड का होने लगेगा अभाव

तो यूँ ही बढ़ा दिया जायेगा पेट्रोल का भाव 

अहंकारी और चाटुकार सत्ता पर काबिज रहेगें

देश की समृद्धि को दीमक की तरह खाते रहेगें

जब सैयां भये कोतवाल तो डर काहे का होगा

रुपया तो अपनी इज्जत को यूँ ही रोता रहेगा

जिसको मिलेगा मौका यूँ ही हाथ धोता रहेगा

आम आदमी जीने की कोशिश में रोज़ मरता रहेगा ……

 

बैठक

 

संवेदन शून्यता की पराकाष्ठा है या विडम्बना

गरीबी अपनी परिभाषा सुन कर शर्मा जायेगी

क्या फर्क पड़ता है आयोग के चिंतकों को

बेशर्म चेहरों पर शिकन क्यों कर आएगी !

टी.वी चैनलों पर खूब गाल बजाते हैं

वातानुकूलित परिवेश में पसीना बहाते हैं

पांचसितारा लंच के बाद स्वीट डिश फरमाते हैं

किसी गरीब के पेट का ख्याल क्यों आयेगा !

बैठकों से गरीबी तो नहीं मिट पायेगी

मगर बेचारा गरीब जरुर मिट जायेगा !

कागजों पर पुल सड़क और बाँध बनाते हैं

कमाल के बाजीगर हैं सत्ता के ठेकेदार ,

कागजी आंकड़ों से गरीबी कम करके दिखाते हैं !

ये भूख की आग में जलते गरीब को तापते हैं

मानवीय संवेदनाओं से बहुत ऊपर उठ चुके हैं

तभी तो ये नीति निर्धारक थिंक टैंक कहलाते हैं !!!!    

आखिर कब तक

आखिर कब तक !

चुनाव नजदीक आते ही

सज जायेगें दल बदल के बाजार ,

तिलक ,तराजू और तलवार

बने रहेगें चुनावी समर के हथियार ,

उम्मीदवारों के चयन का

जाति और धर्म  होगा आधार ,

जातियों के समीकरण का गणित

तय करेगा वोटों का व्यापार ,

अपराधी ,बाहुबली और माफिया

बनाये जायेगें उम्मीदवार ,

चुनावी सावन में नेता जी

करते रहेगें वादों की बौछार

भाड़े के कार्यकर्ताओं को जुटा कर

करवाया जाता रहेगा  चुनाव प्रचार ,

मतदाता नोट के बदले में वोट  

बेचने का करेगें कारोबार ,

और दो चार मतों का अंतर भी 

माना  जाएगा जीत का आधार ,

कब तलक ये लोकतंत्र

यूँ ही होता रहेगा शर्मसार

बार बार  हरेक बार ………

मौसम चुनाव का

बोतल अब तो लगी है बँटने

मय के प्याले छलक रहे हैं

शाम ढले बस्तियों में साकी 

खादी पहने बहक रहे  हैं

बालाओं  के  ठुमकों  पर

जनता सारी झूम रही है

जनता अपने मत के बदले

कुछ नोटों को चूम रही है

देसी कट्टे , बमों की मंडी

हथियारों से भरी पड़ी है

नेताओं के चक्रव्यूह में

जनआशा हताश खड़ी है

गली मोहल्ले चौराहों पर

नेता जोड़े हाथ खड़े  हैं

राम राज्य का आलम है

बाघ और बकरी संग पड़े हैं

चार दिनों की चाँदनी छायी

जनता का मन भरमाया है

दो दिन कर ले मौज ये जनता

मौसम चुनाव का आया है

मेरा भारत महान

लोकतंत्र की लाज लुट रही

नेताओं में  खींच  तान है  

संसद संज्ञा शून्य हो रहा 

चीख रहा यह संविधान है

पर मेरा भारत महान है !

नेता जी हों या हो अफसर

कांस्टबल हो या हो कलक्टर

जन कल्याण के प्लान लुट रहे

बंदर बाँट में सब समान है

सौ में नब्बे बेईमान है

पर मेरा भारत महान है !

मंडी भरी दलालों से है

रोज मर रहा किसान है

महंगाई और भ्रष्टतंत्र से

जनता का जी परेशान है

सही गलत की बात छोड़ दो

थैली  ही सब समाधान है  

पर मेरा भारत महान है !

तमाचा

लोकतंत्र पर पड़ा तमाचा

बात नहीं ये अच्छी है

जन मन में आक्रोश बहुत है

ये बात भी सच्ची है

संयम का घट भर जाता जब

बहता सारी सीमा तोड़

आक्रोशित जन देता है तब

जनतंत्र का दर्पण फोड़

सत्ता जब बहरी बन जाती

नहीं सुनती जन आशा की

मौन चीख पड़ता है लोगों

नहीं सोचता भाषा की

राजनीति करने वालों का

चाल चलन नहीं बदलेगा

जन मन में जो दबा है लावा

ऐसे ही ये पिघलेगा

समय आ गया सत्ता वालों

अपनी सोच बदल डालो

मंहगाई से जनता जल रही

नमक मिर्च तुम मत डालो