अंतरजातीय विवाह के फायदे और नुकसान

विवाह

भारतीय समाजशास्त्रियों के मतानुसार विवाह नामक संस्था के उद्भव और विकास का श्रेय मुनि उद्दालक के पुत्र, श्वेतकेतु को जाता है | ऋषि श्वेतकेतु ने तत्कालीन समाज में व्याप्त अव्यवस्था और कदाचार को दूर कर एक मर्यादित और उत्तरदायित्व की भावना से प्रेरित संस्था की नींव डाली | कालांतर में विवाह एक महत्वपूर्ण सामाजिक संस्था के रूप में स्थापित हुआ तथा  सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य पर  विविध आयामों में अपनी अनिवार्यता का अहसास कराता रहा |

बदलते कालखंड के संग संग विवाह के सामाजिक और सांस्कृतिक स्वरुप में भी कई बदलाव आते चले  गए| जहाँ एक ओर कुछ परिमार्जित संस्कारों ने विवाह के स्वरुप को एक दिव्य संस्कार के रूप में प्रतिस्थापित कर दिया तो वहीं दूसरी ओर दहेज,जाति एवं वर्ण व्यवस्था जैसी कुरीतियों ने इसकी आत्मा को निष्प्राण कर दिया | कट्टरपंथियों ने विवाह की  सामाजिक अनिवार्यता को गौण कर इसे एक जटिल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में परिवर्तित कर दिया | समय समय पर अनेक समाज सुधारकों ने इस संस्था के मूल स्वरुप को जीवंत बनाये रखने के प्रयास किये और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने में सफल भी रहे |

वर्तमान काल में भी परिवार या विवाह जैसी  सामाजिक संस्थाओं में  अनेक सामाजिक और सांस्कृतिक  परिवर्तन हुए हैं | रूढ़िवादी मानसिकताओं के प्रति विद्रोह के स्वर मुखर होते जा रहे हैं | विवाह भी इससे अछूता नहीं रहा है और इसके स्वरुप में भी अनेक बदलाव दृष्टिगोचर हो रहे हैं | अंतरजातीय विवाह का प्रसंग पहले भी यदा कदा  उठता रहा है  परन्तु विगत दो तीन दशकों से  इसका चलन सामाजिक स्तर पर अधिकाधिक स्वीकार्य होता जा रहा है | अनेक जातियों और उपजातियों के जटिल चक्रव्यूह में उलझ कर भारतीय समाज अक्सर अपने सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्वों के निर्वहन में असहाय सा अनुभव करने लगता है | अंतरजातीय विवाह इन जटिल परिस्थितिओं से अलग  एक नये सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश का सृजन करने में अहम भूमिका निभा रहा है |

किसी भी विचारधारा के समर्थन और विरोध में स्वर उठना स्वाभाविक है परन्तु उस विचारधारा की जीवंतता और निरंतरता उसकी सामाजिक स्वीकार्यता पर निर्भर करती   है | अंतरजातीय विवाह ने आधुनिक भारतीय समाज को एक नया स्वरुप प्रदान किया है जो स्वागतेय है | दो अलग अलग परिवेश से निकल कर आये व्यक्तित्व जब विवाह के पवित्र बंधन में आबद्ध हो कर एक नयी सामाजिक इकाई के रूप में विकसित होने लगते हैं ,तो कई स्तरों पर  जुड़ाव की प्रक्रिया सामाजिक समन्वय के नए प्रतिमान स्थापित करने लगती है | क्षेत्रीय और प्रांतीय संस्कृतियों का एक दूसरे को समझने और आत्मसात करने की प्रक्रिया एक नवीन सांस्कृतिक परिवेश का सृजन करने लगती है |

यदि इतिहास के पन्नों में अंतरजातीय विवाह के विषय में अन्वेषण किया जाय तो कई रोचक और प्रेरणादायक प्रसंग उपस्थित हो जाते हैं | पौराणिक कथाओं में ब्रम्हा और गायत्री का विवाह प्रसंग हो या महाराज शांतनु और सत्यवती का परिणय प्रसंग ,हूणों और मुगलों के काल में किये गए सामरिक विवाह संबंध हों  या विभिन्न प्रांतीय क्षत्रपों द्वारा स्थापित किये गए विवाह संबंध ,सभी दृष्टान्त अंततः सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नयन का संवाहक  बने | वर्तमान  समाज की जीवंतता और गत्यात्मकता में भी अंतरजातीय विवाह संबंधों ने महत्वपूर्ण रचनात्मक भूमिका निभाई है | खान पान ,वस्त्र विन्यास , क्षेत्रीय और प्रांतीय प्रभावयुक्त भाषा शैली और लोक साहित्य , स्थानीय रहन सहन ,लोक परम्परा एवं हस्त कला,लोक नृत्य एवं लोक गीत इत्यादि का समन्वय और सम्मिश्रण ,समाज को नवीनता  का अनुभव कराता है और नवीन सांस्कृतिक आयामों को जन्म देता है | अंतरजातीय प्रकृति के विवाह संबंध  दो पृथक समुदायों के बीच सेतु की भूमिका निभाते   हैं | समाज और लोक संस्कृति को समन्वित और परिमार्जित करने  के साथ साथ नए आयामों को आत्मसात करने के अवसर उपलब्ध कराते हैं | सौहाद्र और बंधुत्व की भावना बलवती होती है तथा  स्थानीय एवं क्षेत्रीय परिवेश  से  निकल  कर  एक विस्तृत फलक पर  “वसुधैव कुटुम्बकम”  का  सूत्र  प्रतिध्वनित  होने लगता  है |

अंतरजातीय विवाह संबंधों के, जहां  एक ओर सकारात्मक और धनात्मक परिणाम परिलक्षित हुए हैं  वहीं कुछ नकारात्मक प्रतिफल भी दृष्टिगत हुए हैं | अनेक अवसरों पर इस तरह के संबंधों को सामाजिक विरोध और बहिष्कार का सामना भी करना पड़ा है | समुदायों के मध्य वैमनश्यता और असहिष्णुता की स्थिति का निर्माण होने लगता है | तनावयुक्त परिवेश में मानवीय संवेदनाओं और कोमल भावनाओं पर कुठाराघात ,पाशविकता को सर उठाने का अनुकूल अवसर  उपलब्ध करा देती है | समाज के उपेक्षापूर्ण व्यवहार से प्रताड़ित युगल नकारात्मकता का शिकार हो जाते हैं और कभी कभी तो आत्म हनन को उद्यत हो जाते हैं | सामाजिक स्वीकार्यता का आभाव वैवाहिक दायित्वों के निर्वहन में बाधा बन जाती है और फलस्वरूप एक नवसृजित विवाह संबंध अवसान की ओर अग्रसर  होने लगता है |

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संचार माध्यमों यथा दूरदर्शन एवं एफ. एम रेडियो ,सिनेमा ,पत्र पत्रिकाओं तथा अन्य सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने अंतरजातीय विवाह संबंधों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित मानसिकता को आत्म विवेचन के लिए बाध्य किया है | आधुनिक समाज इन संबंधों के प्रति उदार दृष्टिकोण अपना रहा है जो भविष्य की चुनौतिओं को देखते हुए स्वागतेय है | अंतरजातीय विवाह संबंधों का संरक्षण और संवर्धन , मानव समाज को संगठित ,जीवंत और कालजयी स्वरुप प्रदान करेगा ,इसमें कोई शंका नहीं होनी चाहिए |   

  

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भ्रष्टाचार के कारण और समाधान

 भ्रष्टाचार

मानवीय अंतरसंबंधों के नियमन और सुव्यवस्थित निष्पादन के लिये हमारे मनीषियों ने गहन चिंतन किया जिसके फलस्वरूप कई नीति निर्धारक दिशा निर्देश अस्तित्व में आये | ‘मनु स्मृति’ से शुरू हुई इस विचार यात्रा में चाणक्य सरीखे चिंतकों ने सामाजिक और राजनैतिक संदर्भों पर प्रजा और राजा दोनों के ही कर्तव्यों पर प्रकाश डाला | कालक्रम में कई सुयोग्य शासकों ने अनुकरणीय सामाजिक और राजनैतिक समझ का परिचय देते हुए एक जीवंत, समृद्ध और स्थापित मूल्यों के प्रति जागरूक समाज की परिकल्पना को मूर्त रूप प्रदान किया | स्थापित मूल्यों से इतर आचरण ,भ्रष्टाचार को जन्म देता है | आचार ,विचार और व्यवहार यदि स्थापित मर्यादाओं  और मूल्यों की अवहेलना करें तो भ्रष्टाचार की उत्पत्ति स्वाभाविक है |

वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में भ्रष्टाचार एक वैश्विक समस्या का रूप ले चुका  है | हमारा देश और समाज भी इस समस्या से अछूता नहीं रहा | भ्रष्टाचार रूपी दैत्य ने जीवन का शायद ही कोई ऐसा आयाम हो जिसे अपना ग्रास नहीं बनाया है | सामाजिक ,सांस्कृतिक ,आर्थिक ,राजनैतिक ,प्रशासनिक या शैक्षणिक ,सभी तंत्र इसके प्रभाव में अपनी अस्मिता को खोते चले जा रहे हैं | भौतिकतावादी संस्कृति से प्रभावित व्यक्ति येन केन प्रकारेण अर्थोपार्जन को ही जीवन का ध्येय मान लेता है | इस लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयास में मानक मूल्यों और आदर्शों को कब और कैसे विस्मृत कर देता है ,ये उसे जब तक अहसास होता है तब तक देर हो चुकी होती है | व्यक्तिगत स्वार्थ ,अदम्य अभिलाषाएं ,और विलासिता भरे जीवन की चकाचौंध उसे किसी भी आदर्श एवं नैतिक मूल्य यहाँ तक कि अपनी अंतरात्मा की आवाज के प्रति उदासीन बना देते हैं | यह सत्य है कि धन संपदा का उपार्जन एवं संचय  चिर काल से मानव मात्र के लिये जीवन का एक महत्वपूर्ण प्रसंग बना रहा है परन्तु आधुनिक सामाजिक व्यवस्था में यह अधिकांश व्यक्तियों के जीवन का एकमात्र अभीष्ट बन कर रह गया है | विज्ञान के विकास के साथ साथ पश्चिम और पूरब के बीच की दूरी सिमटती गई और पाश्चात्य सभ्यता के अंधानुकरण ने भारतीय सामाजिक संरचना में उपभोक्तावादी संस्कृति को सर्वोपरि और सर्वमान्य मूल्य का स्थान दे दिया | विगत तीन दशकों से आर्थिक सम्पन्नता को ही जीवन में सफलता का एकमात्र मापदंड मान लेने का चलन दिनानुदिन  बहुमत में आता दिख रहा है | समाज में  विलासितापूर्ण जीवन शैली का महिमामंडन जन साधारण  के शब्दकोष से संतोष ,परिश्रम ,कर्तव्य ,निष्ठा और ईमानदारी जैसे शब्दों को मिटा  देती हैं | धनोपार्जन की क्षमता से अधिक व्यय की परिस्थितियों में अधिकांश व्यक्ति अपनी नैतिकता को दांव पर लगा देते हैं | निर्विवाद रूप से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि भ्रष्टाचार का सबसे कारण धन लोलुपता है |

यदि हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी इस सामाजिक कोढ़ से सुरक्षित रहे तो आज से ही इसका प्रभावशाली निदान तलाशना होगा | सर्वप्रथम पारिवारिक स्तर पर मानवीय मूल्यों का संवर्धन एवं संरक्षण सुनिश्चित करना होगा | प्रतिस्थापित सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति यदि बाल अवस्था से ही सम्मान का भाव जगाया जाय तो संभव है कि भ्रष्ट आचरण को त्याज्य समझने वालों के मनोबल में और दृढ़ता का संचार होगा | भ्रष्ट जीवन शैली और भ्रष्टाचारियों  का महिमामंडन  करने की बजाय सामाजिक बहिष्कार हो | सांस्कृतिक पुनर्जागरण की प्रक्रिया को जन आंदोलन का रूप दे कर ईमानदार और स्वच्छ छवि के लोगों को सामने आना होगा और जन साधारण के मानस पर छा गए भ्रष्टाचार के सम्मोहन को तोडना होगा | साहित्यकारों और समाज के सृजनशील व्यक्तित्वों को अपनी कृतियों से वह प्रकाश फैलाना होगा जो भ्रष्टाचार के अन्धकार को मिटा दे | समय आ गया है कि जन मानस इस बात का मंथन और चिंतन करे कि ,

                                                                पाता क्या नर कर प्राप्त विभव ?

                                           चिंता  प्रभूत अत्यल्प हास , कुछ चाक्य चिक्य कुछ पल विलास

                                            नर   विभव  हेतु  ललचाता  है , पर  वही  मनुज  को  खाता  है  |

यदि सनातन दर्शन , अध्यात्म और चारित्रिक शुद्धता के प्रति नैराश्यपूर्ण वातावरण से मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लेकर प्रयास किये जायें तो निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ी एक भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण में सांस ले सकेगी | आज यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि जन मानस निम्नांकित पंक्तियों में व्यक्त उदगार को अपने जीवन में चरितार्थ करने का प्रयास करे ;

                                                                       साई इतना दीजिए जामे कुटुंब समाय

                                                                         मैं भी भूखा न रहूँ साधू न भूखा जाय

इसमें कोई संदेह नहीं कि नैतिक,वैचारिक,आत्मिक और चारित्रिक पवित्रता ,भ्रष्टाचार के रक्तबीज का नाश करने में सक्षम होगी और एक सार्थक सामाजिक परिवेश का सृजन करेगी |

इंटरनेट से लाभ या हानि

 

internet 

इंटेरनेट या विश्व अंतरजाल  विज्ञान की ऐसी उपलब्धि है जिसने सूचना तकनीकि के क्षेत्र में असीमित  संभावनाओं के द्वार खोल दिये | इंटेरनेट की संकल्पना ने “गागर में सागर” को चरितार्थ कर दिया है | ज्ञान ,विज्ञान ,साहित्य ,सूचना ,मनोरंजन और विविध विषयों पर विस्तृत तथ्य क्षण मात्र में नज़रों के सामने उपस्थित हो जाते हैं | अस्सी के दशक से आकार लेता नब्बे की दशक के मध्य तक आते आते इस तकनीक ने सूचना तकनीकि के पटल पर अनेक अभिनव आयामों को स्थापित कर दिया | मानवीय कल्पनाओं को नई ऊँचाईयों पर ले जाता इंटेरनेट आज समाज के एक बड़े वर्ग के दैनिक जीवन का अविभाज्य और अनिवार्य अंग बन गया है |

 

विश्व अंतरजाल पर घटित होने वाली गतिविधियों ने आधुनिक विश्व समुदाय में एक नवीन सांस्कृतिक चेतना का संचार किया है | जिस प्रकार किसी भी विचारधारा या उपलब्धि के अनेक आयाम होते हैं, उसी तरह इंटेरनेट के भी धनात्मक और ऋणात्मक आयाम हैं| इसमें कोई मतभेद नहीं हो सकता कि इस तकनीक के आविर्भाव और चरणबद्ध विकास के साथ साथ विश्व समुदाय में अनेक स्तरों पर बौद्धिक सामग्रियों का विनिमय अत्यंत सहज एवं सुगम हो गया| वैचारिक और व्यापारिक दोनों ही स्तरों पर आदान प्रदान की प्रक्रिया ने एक ऐसी सामाजिक चेतना का विकास किया जिसने सात समंदर की दूरिओं को पाट कर ‘दुनिया को मुट्ठी’ में कर लेने के स्वप्न को साकार सा कर दिया | अनेकानेक प्रश्नों के समाधान का कुंजी-पटल (की बोर्ड) पर बस एक आघात में उपलब्ध हो जाना, किसी इन्द्रजाल का आभास करा देता है और हम विज्ञान की क्षमताओं के आगे नतमस्तक हो जाते हैं | इंटरनेट के वित्तीय एवं वाणिज्यिक प्रयोगों ने बाज़ार की मूलभूत अभिधारणाओं को नया जामा पहना दिया है | ई कॅामर्स  और ई बाजार की दिनानुदिन बढती लोकप्रियता ने सेवा प्रदाताओं और उपभोक्ताओं के बीच की दूरी को एक आघात (हिट) से मिटा दिया है | ई बैंकिंग ने बैंकिंग सेवाओं को खाताधारकों के द्वार तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है | रेल आरक्षण  हो या बिजली ,पानी और टेलीफोन के बिल का भुगतान ,सभी कार्य घर बैठे अत्यंत सुगमता से करना संभव  हो गया है | ज्ञान पिपासुओं के लिये अंतरजाल पर उपलब्ध विविध पाठ्य सामग्री ,कला और साहित्य प्रेमियों के लिये मनवांछित दृश्य एवं श्रव्य कृतियों के वृहद संकलन ने इसे बुद्धिजीविओं की सहचरी की संज्ञा दे दी है |

 

इंटरनेट का रचनात्मक पक्ष मानव समाज के  बौद्धिक एवं  नैतिक स्तरों पर  उत्थान का पर्याय बनता जा रहा है परन्तु नकारात्मक और विकृत मानसिकता के पोषक तत्वों द्वारा इस माध्यम का दुरूपयोग भी बढता जा रहा है | पीत पत्रकारिता हो या अश्लीलता को परोसती साइटें ,हैकिंग के दुष्परिणाम हों या गोपनीय सूचनाओं की चोरी ,इन सब गतिविधियों ने अंतरजाल के जाल में प्रयोगकर्ताओं को उलझा कर रख दिया है | इंटरनेट पर व्यावसायिक लेन देन के प्रकरणों  में जालसाजी और धोखाधड़ी के मामलों ने ग्राहकों और सेवा प्रदाताओं दोनों को ही सशंकित और सावधान कर दिया है |  पोर्न वीडियो और पाठ्य सामग्री की सहज एवं सुलभ उपलब्धता ने सांस्कृतिक प्रदूषण की हदों को पार कर दिया है जिसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव बाल,किशोर एवं युवा मानसिकता पर दृष्टिगोचर हो रहा है | नग्नता और उन्मुक्त यौन संबंधों की वकालत करते साईट्स समाज की  नैतिक अभिधारणाओं पर प्रहार कर रहें हैं | इस  समस्या के प्रति हमें जागरूक होना पड़ेगा अन्यथा संबंधों की मर्यादा ,आबरू ,इज्जत जैसे शब्दों का अस्तित्व खतरे में पड़ जायेगा | इंटरनेट सर्फिंग की लत के शिकार युवा चैटिंग ,फेसबुक सरीखे सोशल मीडिया के अनुप्रयोग से नकारात्मकता का ग्रास भी बनते जा रहे हैं जिसका परिणाम अनेक युवाओं द्वारा किये जा रहे आत्महत्याओं के रूप में सामने आया है |

 

असीमित संभावनाओं को अपने गर्भ में छिपाए इस संचार एवं सूचना तकनीक का सकारात्मकता तथा सृजनात्मकता से परिपूर्ण अनुप्रयोग सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व बन गया है | अभिभावकों को जागरूकता का परिचय देना पड़ेगा और बच्चों को इसके कुप्रभाव से बचाने के लिए साकांक्ष होना पड़ेगा |  समय की मांग है कि अंतरजाल पर घटित हो रही अवांछित गतिविधिओं पर यथाशीघ्र अंकुश लगाया जाय और इसके दुष्प्रयोग को रोकने के लिए कठोर वैधानिक प्रावधान लाए जायें | भारत जैसे विकाशील देश के लिये यह आवश्यक है कि इंटरनेट की सुविधा का प्रसार ग्रामीण क्षेत्रों तक शीघ्रता से हो और ई- गवर्नेंस की संकल्पना को मजबूत आधार मिल सके | यदि इंटरनेट सेवा के स्याह पक्ष को ,उपयोगकर्ता  अपनी सकारात्मक और रचनात्मक सोच से दूर कर सकें तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिये विज्ञान के इस वरदान को विभिन्न सार्थक उपादानों से सुसज्जित कर सकें तो निश्चित रूप से भविष्य का वैश्विक समाज प्रगति  के नए आयामों को स्थापित करेगा |

          

     

हिंदी ,चुनौतियाँ और सरोकार

 

महाकवि विद्यापति ने कभी कहा था कि “देसिल बयना सबजन मिठ्ठा” परन्तु माँ भारती के माथे की बिंदी “हिंदी” की

मिठास  को  आज  अनुभूति  के  नए परिदृश्य में परिभाषित करना अपेक्षित प्रतीत हो रहा है | आधुनिकता की चाशनी

में  पगी  हुई  हिंदी  की  स्वीकार्यता  का  आकलन  करना  प्रासंगिक  तो  होगा  ही  संग  संग  अपेक्षित भी |

विगत दो दशकों में हिंदी ने वैश्विक समाज को भाव सम्प्रेषण के लिए एक वैविध्यता

और  संभावनाओं   से  परिपूर्ण  माध्यम  उपलब्ध  कराया  है | हिंदी  के  वैश्वीकरण

के  फलस्वरूप  जो सामाजिक , आर्थिक , तकनीकी , साहित्यिक , सांस्कृतिक  एवं

राजनैतिक चुनौतियाँ उभर कर आई  हैं इनका विश्लेषण राष्ट्रभाषा को नए आयामों

से अलंकृत करेगा | विश्व  हिंदी  सम्मेलनों के माध्यम से पूर्व में जिन सरोकारों को

संबोधित करने का प्रयास किया गया है ,उनकी  सार्थकता  और उपादेयता पर वर्तमान परिदृश्य के आलोक में चिंतन

एक महत्वपूर्ण प्रसंग है | देव भाषा संस्कृत की गंगोत्री  से  निकल  कर  हिंदी   का  प्रवाह  विभिन्न  प्रांत , सांस्कृतिक

परिवेश , सामाजिक  एवं  धार्मिक  मान्यताओं  को  अपनी  संप्रेषणीयता  के  सूत्र  में  बांधता गतिमान रहा है | आज

कश्मीर  से  कन्याकुमारी तथा गुजरात से  मिजोरम तक हिंदी ने अपनी महत्ता  को  स्थापित  कर  लिया  है | विगत

पाँच- छः  वर्षों  में विश्व  अंतरजाल  पर  हिंदी   भाषा   एवं  साहित्य  ने  सम्मानजनक  उपस्थिति   दर्ज   कराई  है |

दिनानुदिन अंतरजाल पर हिंदी  साइटों  की संख्या में वृद्धि हो रही है परंतु गुणवत्ता की दृष्टि से इनका आकलन एक

महत्वपूर्ण  विषय  है | गूगल  जैसी  सूचना  तकनीक के क्षेत्र  की  कंपनियों के प्रयास से देवनागरी लिपि में टाइपिंग

अत्यंत सुगम हो गया  है | माइक्रोसॉफ्ट और लिनुक्स  आदि  ऑपरेटिंग  सिस्टम्स ने हिंदी की महत्ता को स्वीकार

करते हुए अपने तकनीकी  उत्पादों  का  हिंदी संस्करण भी उपलब्ध कराया है | आज हिंदी को किसी उत्पाद की भांति

एक सक्षम विपणन रणनीति  के  अंतर्गत प्रचारित और प्रसारित करने की आवश्यकता है | आज का युवा वर्ग जहाँ

एक ओर छपी हुई पत्र पत्रिकाओं  और  पुस्तकों  के  प्रति  उदासीन होता जा रहा है वहीं दूसरी तरफ कंप्यूटर ,टेबलेट

और मोबाइल के माध्यम से अंतरजाल पर अधिक से अधिक सक्रिय होता जा रहा है | हिंदी ब्लोगिंग या चिट्ठाजगत

की लोकप्रियता तेजी से बढ़ती जा रही है और इसके माध्यम  से  कई  नवोदित  रचनाकार  हिंदी  साहित्य एवं भाषा

को जनसाधारण की अपेक्षाओं से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं  | हिंदी की साहित्यिक धरोहर  को डिजिटाइज्ड स्वरुप

में विश्व अंतरजाल पर उपलब्ध कराने का प्रयास निश्चित रूप से प्रशंसनीय है |टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले

धारावाहिक  हों  या  हिंदी  सिनेमा  जगत , इन  क्षेत्रों  में बढ़ता निवेश हिंदी के लिए शुभ संकेत है | तेजी से बदलते

सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश  से  हिंदी  भाषा और साहित्य भी अछूता नहीं रहा है | रचनाकार तथा पाठक ,

विषय वस्तु एवं विन्यास ,प्रस्तुतीकरण एवं शिल्प शैली ,इन सभी बिंदुओं की प्रासंगिकता पर चर्चा की आवश्यकता

है | हिंदी  की  एक अर्थव्यवस्था तेजी से अपने पाँव पसार रही है ,समय की मांग है कि इस अर्थव्यवस्था की संरचना

को बेहतर ढंग से परिभाषित करते हुए ,आधुनिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक सरोकारों के संग समन्वित करने का

प्रयास किया जाय |महान रचनाकार भारतेंदु हरिश्चंद्रजी का ये कथन  कि  “निज भाषा उन्नति  अहै, सब  उन्नति

को  मूल” आज  भी  हम  सबके  लिए  प्रेरणास्रोत  है | आज   इस   मूल  मंत्र  को  प्रत्येक  हिंदी  प्रेमी  अपने  हृदय

में  स्थान  दे  कर  राष्ट्रभाषा  के  सर्वांगीण विकास  में  महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है |