कविता

कविता

 

कविता ठहराव , रवानी है

कभी सूखी है कभी पानी है

कभी बचपन है कभी चौथापन

कभी अल्लहड़  मस्त जवानी है

ये गीत भी है संगीत  है ये  

कविता जीवन की कहानी है 

संघर्ष कभी समझौता है

कभी वाचक है कभी श्रोता है

लय भी है कभी छंद है ये

कभी बद्ध कभी स्वछंद है ये

कभी तीव्र है ये कभी मंद है ये

कभी शोक कभी आनंद है ये

स्वप्न कभी , कभी सत्य है ये

जीवन पर एक वक्तव्य है ये

पूजन है ये कभी वंदन है

कविता तो आत्मनिवेदन है

हारे मन की आस है ये

शून्य में भी विश्वास  है ये

प्रेम है ये कभी पीड़ा है

कविता मोहन की मीरा है

रस भाव की ये अभिव्यक्ति है

अभिधा लक्षण की शक्ति है

है अलंकार का चमत्कार

कविता तुलसी की भक्ति है

स्थिरता है , चंचलता है

अंतर से कभी पिघलता है

कभी शीतल मंद बयार है ये

कभी शाश्वत सत्य विचार है ये

कभी मनोरंजन कभी चिंतन है

कविता तो बाँकी चितवन है

उपवन में बिखरी छटा है ये

अलकों पर छाई घटा है ये

रसिक  भ्रमर का गुंजन है

कविता तो शीतल चन्दन है ……………

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जीवन

 

जीवन संग्राम ,समर्पण है

हर्ष ,श्रान्ति का दर्पण है2013-04-20-1595(0)(1)_Q1

आह्लाद है ये अवगुंठन है

निर्बंध है ये कभी बंधन है

ठहराव भी है चंचलता भी

संताप है ये शीतलता भी

आलाप है ये विलाप भी है

वरदान कभी अभिशाप भी है

आनंद भी है आताप है ये

प्रकृति का पुण्य प्रताप है ये

ये गीत भी है कभी कविता भी

कभी भरा हुआ कभी रीता भी

कभी उदासीन कभी आशा है

एकांत कभी ये तमाशा है

कभी लोभ मोह कभी ईच्छा है

कभी दग्ध ह्रदय की प्रतीक्षा है

अदम्य है ये दुर्गम्य है ये

अपराध कभी ,कभी क्षम्य है ये

कभी विरह ,मिलन ,आलिंगन है

अभ्यर्थन है अभिनन्दन है

पल पल होता परिवर्तन है

जीवन प्रकृति का नर्तन है

कभी तेजोमय ,प्रचंड ,प्रखर

लगता सर्वस्व कभी नश्वर

कभी फूल रहा कभी धूल रहा

अनुकूल कभी प्रतिकूल रहा

सम्मोहन है एक सपना है

अब जैसा भी है अपना है

अब जैसा भी है अपना है ……..

उत्कर्ष

 

क्या हुआ जो सपने टूट गए

कुछ स्वर्णिम अनुभव छूट गए

बीत गया पहला खुमार

हुआ शांत वो अदम्य ज्वारउत्कर्ष१

चलते चलते जो लगी ठेस

उद्विग्न कर गया कोई क्लेश

मंजिल जब दिखने लगी दूर

नियति भी लगने लगी क्रूर

ये क्रम तो चलता जायेगा

पौरुष को रोक न पायेगा

आओ मिल कर संघर्ष करें

निज उन्नति, उत्कर्ष करें …….

अक्सर

 

नहीं देखता स्वप्न कोई मैंself1

बस यथार्थ से  लड़ता हूँ

खुशी बाँटने की कोशिश में

चोट भी सह के झरता हूँ  

क्यों देखूँ मैं दोष और का

संभल संभल पग धरता हूँ

औरों की सुन लेता हूँ सब

पर अपनी ही करता हूँ

अपनी सुन लेता हूँ हँस कर

परनिंदा से डरता हूँ  

जीने की कोशिश में

अक्सर कई बार मैं मरता हूँ ……..

चुनमुन और गोरैया

 

चुनमुन भैया और गोरैया मिल कर उधम मचातेचुनमुन  और गोरैया

आँगन में अमरुद  के  नीचे  खूब फुदकते गाते

सुबह सबेरे  चीं चीं  करती  टोली लेकर आती

चुनमुन चुनमुन करती सब और शोर मचाती जाती

भरी कटोरी पानी लेकर चुनमुन बाबू आते

सारा आँगन घूम घूम कर दाना भी फैलाते  

फुर फुर करती इधर उधर नन्हीं गोरैया रानी

दाना तिनका चुनती जाती और खोजती पानी

दाना चुन कर प्यास बुझा कर गोरैया उड़ जाती

कल की कल देखी जायेगी चुनमुन को कह जाती ……

इंटरनेट से लाभ या हानि

 

internet 

इंटेरनेट या विश्व अंतरजाल  विज्ञान की ऐसी उपलब्धि है जिसने सूचना तकनीकि के क्षेत्र में असीमित  संभावनाओं के द्वार खोल दिये | इंटेरनेट की संकल्पना ने “गागर में सागर” को चरितार्थ कर दिया है | ज्ञान ,विज्ञान ,साहित्य ,सूचना ,मनोरंजन और विविध विषयों पर विस्तृत तथ्य क्षण मात्र में नज़रों के सामने उपस्थित हो जाते हैं | अस्सी के दशक से आकार लेता नब्बे की दशक के मध्य तक आते आते इस तकनीक ने सूचना तकनीकि के पटल पर अनेक अभिनव आयामों को स्थापित कर दिया | मानवीय कल्पनाओं को नई ऊँचाईयों पर ले जाता इंटेरनेट आज समाज के एक बड़े वर्ग के दैनिक जीवन का अविभाज्य और अनिवार्य अंग बन गया है |

 

विश्व अंतरजाल पर घटित होने वाली गतिविधियों ने आधुनिक विश्व समुदाय में एक नवीन सांस्कृतिक चेतना का संचार किया है | जिस प्रकार किसी भी विचारधारा या उपलब्धि के अनेक आयाम होते हैं, उसी तरह इंटेरनेट के भी धनात्मक और ऋणात्मक आयाम हैं| इसमें कोई मतभेद नहीं हो सकता कि इस तकनीक के आविर्भाव और चरणबद्ध विकास के साथ साथ विश्व समुदाय में अनेक स्तरों पर बौद्धिक सामग्रियों का विनिमय अत्यंत सहज एवं सुगम हो गया| वैचारिक और व्यापारिक दोनों ही स्तरों पर आदान प्रदान की प्रक्रिया ने एक ऐसी सामाजिक चेतना का विकास किया जिसने सात समंदर की दूरिओं को पाट कर ‘दुनिया को मुट्ठी’ में कर लेने के स्वप्न को साकार सा कर दिया | अनेकानेक प्रश्नों के समाधान का कुंजी-पटल (की बोर्ड) पर बस एक आघात में उपलब्ध हो जाना, किसी इन्द्रजाल का आभास करा देता है और हम विज्ञान की क्षमताओं के आगे नतमस्तक हो जाते हैं | इंटरनेट के वित्तीय एवं वाणिज्यिक प्रयोगों ने बाज़ार की मूलभूत अभिधारणाओं को नया जामा पहना दिया है | ई कॅामर्स  और ई बाजार की दिनानुदिन बढती लोकप्रियता ने सेवा प्रदाताओं और उपभोक्ताओं के बीच की दूरी को एक आघात (हिट) से मिटा दिया है | ई बैंकिंग ने बैंकिंग सेवाओं को खाताधारकों के द्वार तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है | रेल आरक्षण  हो या बिजली ,पानी और टेलीफोन के बिल का भुगतान ,सभी कार्य घर बैठे अत्यंत सुगमता से करना संभव  हो गया है | ज्ञान पिपासुओं के लिये अंतरजाल पर उपलब्ध विविध पाठ्य सामग्री ,कला और साहित्य प्रेमियों के लिये मनवांछित दृश्य एवं श्रव्य कृतियों के वृहद संकलन ने इसे बुद्धिजीविओं की सहचरी की संज्ञा दे दी है |

 

इंटरनेट का रचनात्मक पक्ष मानव समाज के  बौद्धिक एवं  नैतिक स्तरों पर  उत्थान का पर्याय बनता जा रहा है परन्तु नकारात्मक और विकृत मानसिकता के पोषक तत्वों द्वारा इस माध्यम का दुरूपयोग भी बढता जा रहा है | पीत पत्रकारिता हो या अश्लीलता को परोसती साइटें ,हैकिंग के दुष्परिणाम हों या गोपनीय सूचनाओं की चोरी ,इन सब गतिविधियों ने अंतरजाल के जाल में प्रयोगकर्ताओं को उलझा कर रख दिया है | इंटरनेट पर व्यावसायिक लेन देन के प्रकरणों  में जालसाजी और धोखाधड़ी के मामलों ने ग्राहकों और सेवा प्रदाताओं दोनों को ही सशंकित और सावधान कर दिया है |  पोर्न वीडियो और पाठ्य सामग्री की सहज एवं सुलभ उपलब्धता ने सांस्कृतिक प्रदूषण की हदों को पार कर दिया है जिसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव बाल,किशोर एवं युवा मानसिकता पर दृष्टिगोचर हो रहा है | नग्नता और उन्मुक्त यौन संबंधों की वकालत करते साईट्स समाज की  नैतिक अभिधारणाओं पर प्रहार कर रहें हैं | इस  समस्या के प्रति हमें जागरूक होना पड़ेगा अन्यथा संबंधों की मर्यादा ,आबरू ,इज्जत जैसे शब्दों का अस्तित्व खतरे में पड़ जायेगा | इंटरनेट सर्फिंग की लत के शिकार युवा चैटिंग ,फेसबुक सरीखे सोशल मीडिया के अनुप्रयोग से नकारात्मकता का ग्रास भी बनते जा रहे हैं जिसका परिणाम अनेक युवाओं द्वारा किये जा रहे आत्महत्याओं के रूप में सामने आया है |

 

असीमित संभावनाओं को अपने गर्भ में छिपाए इस संचार एवं सूचना तकनीक का सकारात्मकता तथा सृजनात्मकता से परिपूर्ण अनुप्रयोग सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व बन गया है | अभिभावकों को जागरूकता का परिचय देना पड़ेगा और बच्चों को इसके कुप्रभाव से बचाने के लिए साकांक्ष होना पड़ेगा |  समय की मांग है कि अंतरजाल पर घटित हो रही अवांछित गतिविधिओं पर यथाशीघ्र अंकुश लगाया जाय और इसके दुष्प्रयोग को रोकने के लिए कठोर वैधानिक प्रावधान लाए जायें | भारत जैसे विकाशील देश के लिये यह आवश्यक है कि इंटरनेट की सुविधा का प्रसार ग्रामीण क्षेत्रों तक शीघ्रता से हो और ई- गवर्नेंस की संकल्पना को मजबूत आधार मिल सके | यदि इंटरनेट सेवा के स्याह पक्ष को ,उपयोगकर्ता  अपनी सकारात्मक और रचनात्मक सोच से दूर कर सकें तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिये विज्ञान के इस वरदान को विभिन्न सार्थक उपादानों से सुसज्जित कर सकें तो निश्चित रूप से भविष्य का वैश्विक समाज प्रगति  के नए आयामों को स्थापित करेगा |