गलियारा

 

baajiकभी समय के गलियारे में

ताका – झांकी कर लो तुम

भूली बिसरी उम्मीदों से

दो पल बातें कर लो तुम

पता नहीं कब साँझ ढले

कब काया माया छोड़ चले

दुनियादारी ,रिश्ते – नाते

सब बंधन को तोड़ चले

पाना खोना हँसना रोना

ये तो रीत पुरानी है

मेला यूँ ही लगा रहेगा

भीड़ तो आनी जानी है

हर क्षण उसकी कृपा बरसती

अपने हाथ पसारो तुम

बाँटों जितना भी हो पाए

जीती बाजी हारो तुम …..

 

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गलियारा” पर एक टिप्पणी

  1. कभी समय के गलियारे में

    ताका – झांकी कर लो तुम

    भूली बिसरी उम्मीदों से

    दो पल बातें कर लो तुम

    bahut sundar rachna hai Divyansh ji .. aapki rachnaon me bhav aur lay dono ka bahut khusbsurat samnvay hota hai …. padhne me achcha lagta hai …

    saadar
    Manju

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