शनि की खिचड़ी

खिचड़ी

 

नहीं बन रहा काम कोई 

चौपट है कारोबार

लगे सुनाने लाला जी

ज्योतिष को हाथ पसार

नहीं समझ में आता श्रीमन्  

लगी है किसकी हाय

दशा कौन सी दिशा जा रही

कुछ बतलाएं उपाय

पंडित जी ने गणना कर के

फलादेश समझाया

मोटी दान दक्षिणा लेकर

एक उपाय बताया

यदि चाहते तुम संवारना

किस्मत अपनी बिगड़ी

नहीं भूलना खाना तुम

हर शनिवार को खिचड़ी  ……..    

जल ही जीवन है

जल ही जीवन है

निराकार प्रकृति प्रदत्त यह

उद्गम स्थल हिम आगार

निर्जल जलद पटल हो जाए

थम जायेगा जग व्यापार

बूंद बूंद अमृत स्वरुप है

मरू प्रदेश में लाए बहार

मरणासन्न प्राण में कर दे

जीवन ऊर्जा का संचार

निर्विवाद यह परम सत्य है

जल ही जीवन का आधार ……..