रस्म

 

राष्ट्र पर्व का रस्म निभा लेंगणतंत्र

गए दिनों को याद करें

दिशाहीन द्विग्भ्रमित व्यवस्था

जन किससे फरियाद करे

गण का गणित है बिगड़ गया

अब सूत्रों को क्या याद करें  

मन उचाट है उदासीन

है बैठा सर पर हाथ धरे

सेवक बैठा हुक्म चलाये

आओ हम तुम घड़ा भरें

संविधान मृतप्राय पड़ा है

मौन दृष्टि है नयन झरे  

राष्ट्र पर्व का रस्म निभा लें

गए दिनों को याद करें ………..

 

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