अल्हड़ मस्त फकीरा मन

अल्हड़ मस्त फकीरा मन

 

अल्हड़ मस्त फकीरा मन

अपनी धुन में रमा हुआ

क्या खर्चा क्या जमा हुआ

बाँट रहा बस अपनापन

अल्हड़ मस्त फकीरा मन ….

 आनी जानी लगी हुई

ठिठकी साँसें ठगी हुई

माया ममता का बंधन

अल्हड़ मस्त फकीरा मन ….

लगी हुई एक भागमभाग

धुआँ है पसरा नहीं है आग

धन दौलत तृष्णा यौवन

अल्हड़ मस्त फकीरा मन ….

 घटता जाता है तिल तिल

अब भी ओझल है मंजिल

साज श्रृंगार  रहे बन ठन

अल्हड़ मस्त फकीरा मन ….

Advertisements