घोटाला

देश असहाय ,जनतंत्र बेचारा बना फिरता है 

संसद पर लटका ताला है

आस्था मरती रहे तो मरे

जनता को कौन देखनेवाला है !

सत्ता है दावत है हाथ में प्याला है 

किसको पड़ी है जो किसीको मिलता नहीं निवाला है !

टोपी है कुर्ता है गले में माला है

रोज मनाते हैं वो दिवाली 

चाहे देश का निकले दिवाला है !

कर लोगे आप हिफाजत कितनी

चोर जब घर का रखवाला है !

मत कुछ लिखो देखो या बोला करो

उनके पास डंडा चलाने वाला है !

ये सब एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं  

एक से बड़ा दूजा  गाल बजाने वाला है !

जनता बेचारी जी रही है वादों  पर

दम तोड़ती आशाएं हैं कौन आंसू बहाने वाला है !

इनके हाथ हैं आसमान से पाताल तक 

इनकी नज़रों से कुछ नहीं बचने वाला है !

करते हैं नुमाइंदगी जनता की ये

क्या हुआ जो कर लिया घोटाला है !

कर सको जो तुमभी तो किसने रोका है

लूटो बांटो खाओ कौन ऊँगली उठाने वाला है !   

दलाली है रिश्वतखोरी है और घोटाला है

राजनीति है राजनेता हैं और गड़बड़झाला है

रहो चुपचाप बस इतना इंतज़ार करो

कब ये देश रसातल में जानेवाला है

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2 टिप्पणियाँ “घोटाला” पर

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