विरहन

 

आये ना श्याम गिरिधारी

बाट तकत हैं सब सखियन संग

श्री वृषभानु दुलारी

काहे निष्ठुर बने कन्हैया

व्याकुल राधा प्यारी

श्याम दरस को तरसे नैना

कृपा करो हे मुरारी

कहें राधिका सखी विशाखा

अबके दूंगीं गारी

कान्हा संग चित ऐसो लाग्यो

सुध बिसरे ब्रज नारी     

आये ना श्याम गिरिधारी

 

 

 

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ब्रज की गली गली में

 

ब्रज की गली गली में

गूंजे है नाम तेरा

अपना बना लो मुझको

तू ही तो प्राण मेरा

अब तो तेरे शरण बिन

मेरी गति नहीं है

सुध हर लिया है तुमने

अब न मेरी मति है

सुन लो सलोने बांके

मेरा नहीं है अब कुछ

हे राधे  श्याम सुन्दर

सौंपा है तुझको सब कुछ

भटकूँ इधर उधर मैं

खोजूं ठिकाना तेरा

अब प्रभु मुझे उबारो

बिन तेरे कौन मेरा

ब्रज की गली गली में

गूंजे है नाम तेरा

 

शुभाशीष

 

तू मेरा प्रतिरूप ,तुझमें

देखता हूँ अपनी छाया

तेरी निश्छलता में मैंने

अपना खोया समय पाया

ऊँगली पकड़ी ,हाथ पकड़ा

अब तो कंधे को मिलाता

गुजरते वसंत जाते ,

कुछ नये सपने सजाता

हो रहा गंभीर अब तू

मौन से कहने लगा है

छोड़ बचपन का किनारा

धार में बहने लगा है

देखने कई रंग तुझको

वक्त को ललकारना है

विघ्न तो आयेगें अक्सर

नहीं तुमको हारना है  

मेरी पूजा ,कर्म मेरा

तुझसे ही फलीभूत होगा

सफलता तुझको मिलेगी

मेरा पुण्य प्रभूत होगा………

 

शुभेक्षा

*

नित नूतन संकल्प करें  

सन्दर्भ नए साकार करें

नव गति ,नवल विचारों को ,

मुक्त ह्रदय स्वीकार करें

ज्ञान प्रकृति है ,ईश हैं उदगम  

तत्व को अंगीकार करें

मंगलमय हो हर क्षण जीवन

शुभेक्षा स्वीकार करें……….

             **

यूँ ही हंसता रहे ये सावन

हर लम्हा मनभावन हो

प्रमुदित मंगलमय हर क्षण हो

विजय हमेशा आँगन हो

यशः कीर्ति दानशीलता

सुख समृद्धि और सम्मान

सदा आपकी श्री वृद्धि हो

यही कामना है श्रीमान……..

              ***

नित खेलो तुम नई बाजियां

जीत तुम्हारे आँगन हो  

प्रिय जनों का सदा साथ हो  

न विरह का सावन हो

खिली रहे मुस्कान हमेशा

आगत सब मनभावन हो

चाहे जितने बाँटो नित दिन

पत्ते पूरे बावन हो……..

आज़ादी

 

मातृभूमि की करें वंदना

देश पर अपने हमको गर्व

झंडा ऊँचा रहे हमारा

सब को मुबारक राष्ट्र का पर्व

देता है सन्देश दिवस ये

आजादी का मान करो

करो समर्पित अपनी श्रद्धा

वीरों का सम्मान करो

दिया हमें स्वच्छंद गगन ये

काट दिया अंग्रेजी जाल

अब न कोई भूल हो हमसे

आज़ादी को रखें संभाल ……….

उन वीरों को नमन करें

 

मातृभूमि की आन बान पर जिसने जान लुटाया है

उन वीरों को नमन करें आज़ाद जिन्होंने कराया है

व्यथा गुलामी की क्या कहना ,अंतर पर तम छाया था

हर एक धड़कन बंधी हुई थी ,जन मन पर गम छाया था

झूल गए जो देश की खातिर जिसने प्राण गँवाया है

उन वीरों को नमन करें आज़ाद जिन्होंने कराया है

मिली हमें आज़ादी जो ये ,मोल हम इसका पहचाने

शान तिरंगे की रखें हम ,राष्ट्र के गौरव को जानें

गोली खा अपने सीने पर ध्वज जिसने फहराया है

उन वीरों को नमन करें आज़ाद जिन्होंने कराया है !

 

  

फिजां

 

वफा की चाह कैसी दिल में लिये फिरते हो

अब तो चाँद भी फिजां को छोड़ देता है

कहाँ की दोस्ती है कौन निभाने वाला

बुझा के प्यास वो घड़ा फोड़ देता है

कसूर किसका कहें कौन गुनहगार यहाँ

शाम को साया भी छोड़ देता है

इशारे पर उसके ये सांस चलती है

एक लम्हे में हर रुख को मोड देता है

कैसे जज्बात किसकी आरजू में हो मरते

प्यार के बुत को ये जमाना तोड़ देता है ………

कैसे कह दूँ भारत महान !

 

नहीं रही वो आन बान

मिटटी में मिल गयी है वो शान

कहाँ वो गौरव कहाँ मान

खंडित समाज लज्जित है ज्ञान

मिटटी के मोल मिलती है जान

अब नहीं गूंजती है वो तान

चोरी अच्छी मेहनत हराम

बिक रही बेटियाँ सरेआम

पूरब में दिखने लगी शाम

कैसे कह दूँ भारत महान !!!!!!