अवतार


देर बहुत कर दी प्रभु अब तो अवतार लो

प्रजातंत्र पस्त है, नेतृत्व मस्त है

राष्ट्र की दशा पर थोड़ा बिचार लो

अर्थतंत्र देश का जा रहा गड्ढे में

तेरा ही सहारा प्रभु अब तो संभार लो

युग युग अवतार लिए लोक कल्याण को

जल्दी कुछ करो प्रभु कलयुग के प्लान को

घूसखोर हाकिम है , चोर व्यापारी है

ब्लैकमनी   मंहगाई  कालाबाजारी  है

त्राहिमाम त्रहिमाम मची है चारो ओर

अब तो एक एक दिन काटना भी भारी है

घर में  लगी है आग घर के चिराग से

जल्दी कुछ करो प्रभु अब तो उबार लो

देर बहुत कर दी प्रभु अब तो अवतार लो ……….

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2 टिप्पणियाँ “अवतार” पर

  1. घूसखोर हाकिम है , चोर व्यापारी है

    ब्लैकमनी मंहगाई कालाबाजारी है

    त्राहिमाम त्रहिमाम मची है चारो ओर

    अब तो एक एक दिन काटना भी भारी है

    घर में लगी है आग घर के चिराग से

    जल्दी कुछ करो प्रभु अब तो उबार लो

    देर बहुत कर दी प्रभु अब तो अवतार लो ……….

    bahut prabhavshali,sarthak evam samyik rachna… ab prbhu ko avtar le hi lena chahiye…. 🙂

  2. टैक्स पर टैक्स ,टैक्स पर टैक्स जनता परेशान
    काग़ज़ के घोड़ों से हो, ग़रीबों का कल्याण
    टैक्स हमसे लेते हैं, देशहित के नाम पर
    जादू से पहँुचाते हैं, स्विस बैंकी मुकाम पर

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