ममता

 

ममता की शीतल छाया में

सौभाग्य सदा मुस्काता है

काजल का छोटा सा टीका

हर बाधा से टकराता है

बचपन के डगमग करते पग

जब स्नेह का संबल पाते हैं

माँ के फैले दो हाथों में

जीत का जश्न मनाते हैं

संतति के मुख दुःख की रेखा

नहीं माँ से यह जाता देखा

युग हो कोई ,सन्दर्भ कोई

सदियों से बस है यही रीति

अपने सारे दुःख दर्द भूल

बच्चों के लिये है माँ जीती

ममता है ज्यों शीतल चन्दन

हर लेती ताप पीड़ा क्रंदन

सुर नर सब करते अभिनन्दन  

ममता को बारम्बार  नमन …….

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ममता” पर एक टिप्पणी

  1. माँ तो बच्चे के हर जज्बात समझ जाती है….
    अनकही हर बात एक पल में समझ जाती है…

    ये तो प्यार का सागर है…ममता की खान है…
    माँ के रूप में अवतरित स्वयं भगवान है…..

    माँ करीब है इतना ही काफी है ….दुनिया की सारी जन्नत इसके प्यार के आगे फीकी है….

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