शिक्षा

 

शिक्षा का व्यवसायिकरण इस स्तर पर पहुँच गया है जहाँ से नैतिक और चारित्रिक पतन के अध्याय से

साक्षात्कार विवशता प्रतीत होने लगती है | शिक्षा का  बाज़ार  सजाने  और  चलाने  वालों  की  बात तो

समझ में आती है परन्तु शिक्षकों की मौन सहभागिता का अर्थ समझने का प्रयास मन  को  विचलित

कर देता है | प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर  नामांकन की

प्रक्रिया का चक्रव्यूह तो शायद अभिमन्यु  भी न भेद पाते | पात्र

के साथ अन्याय सदैव से होता आया है | चाहे वह एकलव्य का

प्रसंग हो अथवा कर्ण का , सामाजिक मूल्यों के दवाब में जो कुछ

भी  हुआ , कम  से  कम  न्यायसंगत  तो  प्रतीत  नहीं   होता |  

‘सिस्टम’ की दुहाई देकर ‘डोनेशन’ और पैरवी  की  बैसाखी  के

सहारे शिक्षातंत्र अपने उद्देश्यों के साथ  कहाँ   तक   न्याय  कर

पायेगा ,यह तो आने वाला समय ही बता सकता है परन्तु विद्यालय और विद्यार्थी की  अवधारणा  को

शिक्षालय और शिक्षार्थी  में   निरुपित  तथा  परिवर्तित   कर   के  भारत  के  भविष्य को  जिस  प्रकार

दृष्टिहीन  बनाने  का  प्रयास जाने या  अनजाने , किया   जा   रहा   है ,यह   अत्यंत   दुर्भाग्यपूर्ण  है |

आवश्यकता  और अपेक्षा  यह है कि सरस्वती के कृपा पात्र  शिक्षकगण  अपनी  अंतरात्मा  की  आवाज़ 

को  अनसुना  न करें और कम से कम गुणी ,मेधावी तथा प्रतिभासंपन्न विद्यार्थियों के हितार्थ  समय

अवश्य निकालें |   

 

Advertisements

2 टिप्पणियाँ “शिक्षा” पर

  1. सच है शिक्षा तो बस एक व्यापार ही बन गई है…….शिक्षा जगत में तो अंधी डोर मची हुए है..जिसमे न तो शिक्षक गण देख पा रहे है न ही शिक्षा संस्थान..”प्रक्टिकैली” तो संभव नहीं है की अंतरात्मा की आवाज़ को अनसुना न करें….पर हो सकता है आपके आग्रह से परिवर्तन की लहर आ जाए..

  2. कल्याणकारी सरकार का मुख्य दायित्व शिक्षा , सवास्थ्य और सुरक्षा है । सरकार ने शिक्षा से पल्ला झाड लिया है , शिक्षा को बाजार के हवाले कर दिया है । अब शिक्षा पुर्णरुपेण बाजारु हो गई है। पैसा फेक और तमाशा देख का मामला बन गया है । नैतिकता , समाज सेवा , बुजुर्गो व शिक्षको का आदर , राष्ट्र भक्ति सब गौण हो गये है । अब बस रुपया और भौतिकता है ।हम एक गुलामी से निकलकर दूसरी गुलामी का सफ़र तय कर रहे हैं जहाँ रावण की लंका सी समृद्धि तो होगी पर उसी सा कलह और अमानवीय वातावरण भी होगा।

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s