मजदूर

 

जोड़ तोड़ निकाल कर

जुगाड़ ही समाधान है

पैसे की चमक के आगे

श्रम का क्या काम है

मेहनतकश की कौन कहे

वो भी कोई इंसान है ?

पसीने की बूंद में अब

दिखता नहीं भगवान है

मजदूर ,मेहनतकश

एक मजबूर अरमान है

मालिक बना है साधू

मजदूर शैतान है

श्रमिक के अरमान

ठेकेदारों के ठेंगें पर

क्या कर लोगे

‘मजदूर दिवस’ मना कर ……..  

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मजदूर” पर एक टिप्पणी

  1. सच ही कह रहे है आप…की क्या कर लोगे ‘मजदूर दिवस’ मना कर …….. वातानुकूलित कमरों में भले सरकार घंटो भर बेठ कर बाल श्रमिको के लिए कानून बनाये & खूब विचार विमर्श करे पर क्या सही मायने में ये कानून लागू हो पते है…हा मन सकते है की जाने केसे हर साल बाल श्रमिको के आकड़ो में कमी आ जाती है…और उसी को आधार मन कर सरकार निश्चिन्त रहती है की हमारी पोलिसी से बाल श्रमिको का उत्थान हो रहा है…उन बच्चो का क्या ये कसूर है की वो मजदूर वर्ग से है????..उनके ऊपर सारे परिवार की जिम्मेदारी होती है..जो नन्हे हाथो से फटाके की फैक्ट्री में बारूद भरते है…उनके भी सपने है पर वो सब अरमान दफ़न कर दिए जाते है…हम खुशियों में जो फटाके चलाते है उनके पीछे भी वो नन्हे हाथ ही होते है…अपनी खुशियों का गला दबाकर शिक्षा का अधिकार खोकर आज भी करोडो बच्चे बाल श्रमिक बनकर जिंदगी काट रहे है…

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