विदाई

 

मात पिता और भाई बहन का लिए संग में प्यार

चली पिया के संग बसाने एक नया संसार

बाबुल का घर सूना कर के विदा हो गई बहना

सबकी आँखों में बसना तुम रहना बन कर गहना

बिटिया तुमको रखनी है अब दोनों कुल की लाज

आने वाले कल की खातिर तुम्हें सोचना आज

संबंधों को बड़े जतन से रखना खूब सहेज

संस्कार सुन्दर तेरे हैं सबसे बड़ा दहेज

श्रद्धा भक्ति स्नेह समर्पण नित करना तुम दान

धन दौलत समृद्धि पर तुम मत करना अभिमान

दूर नहीं तुम तो हो हर पल हम लोगों के पास

नयी भूमिका तेरी  हमको तुम से बहुत है आस !

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विदाई” पर एक टिप्पणी

  1. aaseem pyar n dular bhara he aapki is vidai me……
    संबंधों को बड़े जतन से रखना खूब सहेज

    संस्कार सुन्दर तेरे हैं सबसे बड़ा दहेज

    श्रद्धा भक्ति स्नेह समर्पण नित करना तुम दान

    धन दौलत समृद्धि पर तुम मत करना अभिमान…

    aapki in lines ka me jaroor dhyan rakhungi…

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