भ्रम


अक्सर सांध्य बेला में             

क्यों मन चाहता है  

हो जाना विलीन समय की

विशाल जल-राशि में ?

क्यों कुछ अशेष प्रश्न

करते हैं मन के

अथाह सागर का मंथन ?

जीवन की संध्या है 

या कि प्रभात ?

जीवन अभी जिया कि नहीं ?

क्यों लगता है कुछ रीता सा ?

क्या है उदय और क्या है अवसान ?

किसलिए ये नश्वर तन परेशान ?

किसके लिये भटकता है मन ?

दिवस की सांध्य बेला में

अहसास प्रभात का होना ,

शायद ये है जीवन का सबसे बड़ा भ्रम …..

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