तो कोई बात बने

 

मिलाओ हाथ कितनी भी गर्मजोशी से ,

मिला सको जो दिल से दिल तो कोई बात बने |

झुकाओ सर मंदिर में चाहे मस्जिद में ,

मिटा दो अगर मैं को तो कोई बात बने |

हँसी लबों पे चिपकाने से भला क्या होगा ,

गर खुद पे हँस सको तो कोई बात बने |

पहुँच जाओ चाहे कितनी भी ऊँचाई पर ,

उठा सको जो मुफलिसों को तो कोई बात बने |

बड़े लोग बन जाने से क्या होगा ‘दिव्यांश’

जो काम आ सको किसी के तो कोई बात बने ………..  

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2 टिप्पणियाँ “तो कोई बात बने” पर

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