बिकते भगवान

 

बिकते हर भगवान ,धर्म को बेच रहे

संस्कृति सम्मान  लाज  को बेच रहे

बना दिया श्रृंगार  बुद्ध  को कहलाते एंटीक

योगेश्वर श्रीकृष्ण बने हैं भोग विलास प्रतीक

संत समागम कथा प्रवचन बना एक ईवेंट

ऋषि मुनि थे जंगली अब ये सिखा रहा कान्वेंट

कैसी श्रद्धा , बिना दाम के दर्शन भी दुर्लभ है

करो बुकिंग अब ऑनलाईन हर पूजा पाठ सुलभ है

कौन पढ़े अब गीता ,समझे उपनिषद  वेद  पुराण

हर चैनल पर ‘जगतगुरु’ सब देते नित व्याख्यान

देवी कौन ,नहीं देव कोई ऐसा है

सब देवों से बड़ा आज बस पैसा है !!

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5 टिप्पणियाँ “बिकते भगवान” पर

    • सोमा जी नमस्कार ,

      जहाँ एक ओर धर्म और आस्था का व्यापार नित नई ऊँचाइयों को छूता जा रहा है वहीँ दूसरी तरफ हम असहाय बने एक गौरवमयी सनातनी परम्परा का दिनानुदिन होता अवमूल्यन देखने के सिवा कुछ नहीं कर पा रहे हैं …….

      एक गीत की दो पंक्तियाँ याद आ रही हैं ..

      रामचंद्र कह गए सिया से ,ऐसा कलयुग आएगा

      हंस चुगेगा दाना तिनका ,कौवा मोती पायेगा

  1. सब देवों से बड़ा आज बस पैसा है !!………….well said

    Part1-2

    ભારત કી સરલ આસાન લિપિ મેં હિન્દી લિખને કી કોશિશ કરો……………….ક્ષૈતિજ લાઇનોં કો અલવિદા !…..યદિ આપ અંગ્રેજી મેં હિન્દી લિખ સકતે હો તો ક્યોં નહીં ગુજરાતી મેં? ગુજરાતી લિપિ વો લિપિ હૈં જિસમેં હિંદી આસાની સે ક્ષૈતિજ લાઇનોં કે બિના લિખી જાતી હૈં! વો હિંદી કા સરલ રૂપ હૈં ઔર લિખ ને મૈં આસન હૈં !http://saralhindi.wordpress.com/

  2. ek dam sahi kaha he apne…paise ke is dor me bhagwan ko bhi nahi chhodte he log.

    “Lekar shiv ka nam pujari kha rahe barfi laddu he…
    kese bhole bhakt tumhare uche uche re…
    patthar ke bhagwan ko puje tumhe na puje re”

    bhagwan khud pragat ho jae to bhi log unko nahi pujenge…..

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