श्रीराम वंदना

 

श्याम वर्ण राजीव नयन

अतुलित तेज प्रकाशित हो ,  

हे पुरुषोत्तम भारतभूषण

कण कण में आप समाहित हो |

मर्यादा के रक्षक हो ,

जीवन का आधार हो तुम ,

मूल्यों के प्रतिपालक हो ,

न्यायोचित व्यवहार हो तुम |

श्रीराम स्नेह के सागर हो ,

शरणागत के तुम तारक हो ,

सुमति सद्गति दे दो हमको ,

प्रभु आप जीव उद्धारक हो …..   

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2 टिप्पणियाँ “श्रीराम वंदना” पर

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