गुनगुनाएं उन क्षणों को

 

गुनगुनाएं उन क्षणों को

हुआ जब जब मन ये पुलकित ,  

काल कवलित हुए जो पल

करें उनको अब विसर्जित |

कमल हो चाहे कुमुद हो

नियति से हो रहे पुष्पित ,

कर्म कर के ही मिलेगा

पायेगा नर मनोवांछित |

बचे पल हैं और कितने

सोचता मन थकित चकित ,

उठो ,दो आवाज़ नभ को

बन सकोगे जगत वंदित !!!!

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2 टिप्पणियाँ “गुनगुनाएं उन क्षणों को” पर

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