संबंध

यूँ ही वो कहते गए ,  

यूँ ही हम सुनते गए

जिंदगी की राह में हम

हमकदम चलते गए ,

कई बातें अनसुनी कीं

रास्तों में रुके भी ,

साथ निभाने की खातिर

कई बार झुके भी ,

हाथ छूटा साथ छूटा 

आस्था बनी रही

दूरियों के दरम्यां भी

दोस्ती बनी रही ,

साथ संबंधों के जो

निभा न पायेगा ,

वो भला इंसान

किसलिए कहलायेगा ????

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