अस्त होते संबंध

सप्तपदी की सुगंध से प्लावित सम्बन्ध ,समष्टि एवं व्यक्ति दोनों को ही जीवन दायिनी ऊर्जा से परिपूर्ण कर देते हैं | आपसी सौहाद्र एवं माधुर्य की चाशनी  में पगते पलों की अनुभूति कड़वे अहसासों के अस्तित्व को  मिटा देती है | वासंती मधुमास का उद्दाम प्रवाह जब  व्यवहारिकता  के ठोस धरातल से टकराता  है तो भौतिकवादी जेठ की तपती दुपहरी का ताप पा भावनात्मकता भाप बन कर संवेदनशून्य विस्तार में खोने लगती   है |

अंतर्संबंधों  के  समन्वयन  और  परिमार्जन  का  आयाम  धूमिल पड़ने लगता है और  उसकी   जगह  निर्देशन  और  स्वामित्व  प्रभावी होने लगता है | जब सम्बन्ध कर्तव्य एवं दायित्व को किनारे कर अधिकार और अपेक्षा की ओर केंद्रित होने लगते हैं तो शनैः शनैः विघटन का ग्रास बनने लगते हैं | निसंदेह  रूप  से  असमय  काल  कवलित  होते  सम्बन्ध एक त्रासदपूर्ण परिवेश का निर्माण करने    लगते हैं परन्तु संबद्ध पक्षकारों का स्थापित मर्यादाओं से विचलन इसे विध्वंश की कगार पर ले जाता    है | ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितिओं  में प्रभावित पक्षों से ये अपेक्षित हो जाता है कि असफल अंतर्संबंधों  की सार्वजनिक व्याख्या न की जाय और भग्नावशेषों को सहेज कर कहीं किसी गुमनाम कोने में सजा कर रखें |       

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