आया वसंत छाया वसंत

आया वसंत, छाया वसंत !

झूम उठा है दिग दिगंत,

आया वसंत, आया वसंत !

स्वर्ण छटा बिखरी खेतों में

सरसों डोल रही है,

कोयल कुहुक कुहुक कानों में

मधु रस घोल रही है |

कोमल कोंपल ,नव पल्लव दल

कलियाँ है अलबेली ,

सुरभित मंद समीर संग पा

करतीं हैं अठखेली |

आम्र वृक्ष मंजरित हो रहे

भँवरे गुंजन करते,

पुष्प सुधा का संचय करते

मधु घट को हैं भरते|  

वन उपवन पर छाया यौवन

शुष्क शीत का हुआ है अंत,

सबके मन भाया वसंत,

प्रकृति पर छाया वसंत,  

आया वसंत, आया वसंत ! 

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