पिता

समग्रता की छाँव है , स्नेह का आवेश है ,

आशाओं की मरुभूमि में  हरित प्रदेश है |

     उपस्थिति  से इसके परिवार में प्रकाश है,

     पिता नहीं तो बच्चों के जीवन में प्यास है |

कोमल कल्पनाओं  का सुखद आधार है ,

हर नवीन कथानक का वो ही सूत्रधार है |

     पिता  के  प्यार में पलता अनुशासन है ,

     कर्तव्यों ,दायित्वों का सम्यक पोषण है |  

श्रमिक का प्रतिरूप है ,सौम्य सुविचार है ,

पिता  का  हाथ साथ हो तो ही बाजार है |

     पिता  है  तो  रोटी  है , बेटा और  बेटी है ,

     परिवार  के  लिए  इसने दुनिया समेटी है |

घर   की  अभेद्य  सुरक्षा  दीवार  है ,

पिता से ही माँ का हँसता संसार है ||

Advertisements

4 टिप्पणियाँ “पिता” पर

    • यशवंत जी नमस्कार
      हिंदी चिट्ठाजगत में आपकी सक्रिय सहभागिता के लिए आपको साधुवाद |
      विभिन्न रचनात्मक प्रयासों को एक मंच पर लाने का प्रयास निश्चित रूप
      से सराहनीय है | आपका हार्दिक आभार एवं धन्यवाद

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s