माया

विगत प्रसंगों के जाले में  

मन जब जब उलझाया है,

अनजानी सी राहों में

यूँ ही मन भरमाया है |

कोशिश की तो कमी नहीं थी

उत्तर  खोज न पाया मैं,

अनसुलझे हैं  प्रश्न कई पर

अपने को सुलझाया  है |

उजड़े मंजर देखे हमने

मन का खालीपन देखा,

गुमनामी में पलते बढ़ते

हँसता सा जीवन देखा | 

कुछ पल हैं ओझल होने को 

लेकिन बढ़ता साया है ,

भटकन की पीड़ा का बंधन 

जीवन की ये माया है !!

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