गणतंत्र

कोटि कोटि प्राणों ने किया उत्सर्ग जब

आज़ादी के सूरज ने किया उजियारा था,

कोटि कोटि कंठों ने गाया जयगान तब

भारती के शान में लगाया जयकारा था |

नयी थी दिशा और नया सा सवेरा था

न था कोई डर अब न कोई अँधेरा था,

आज़ादी की हवा में उमंगों की पतंग पर

बुलंद भारत की  भविष्य का बसेरा था |

तूफानों से  निकली  हुई  किश्ती  को

बड़ी मुश्किल से मिला ये किनारा  था,

जनम लिया  था एक  नए भारत  ने

संविधान ला कर के गणतंत्र को संवारा था |

कोटि कोटि प्राणों ……………….

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