ताजमहल

एक नगमा प्यार का है

या कोई दिलकश गज़ल ,

शाहजहां के सपनों की

सूरत  है  ताजमहल |

इश्क गई बन इबादत

धड़कनों ने की दुआ ,

कायनात झूम उठी

जब ये कयामत हुआ ! 

ख्वाब की तामीर में

कैसे कटे होंगे वो पल ,

उभरा जो होगा अक्श कोई

जैसा है ये ताजमहल |

जुनूने इश्क का जादू

सदियों तक चलता जायेगा

पर कभी क्या दूसरा

ताज भी बन पायेगा !

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