बंद मुट्ठी

साल का अवसान हो गया

कई यादों को समेटे,

कुछ सृजन के चित्र हैं

तो कुछ अधूरे स्वप्न टूटे |

काल का यह चक्र अविरत

नित नई मंजिल को पाता ,

प्रेरणा के स्वरों से

सोये प्राण को जगाता |

मधुर स्मृतियाँ समेटे

मुदित मन से गीत गाएं ,

दृढ़ प्रतिज्ञ आस्था से  

पूर्ण स्वरों में समाएं |

बंद मुट्ठी खोल ग्यारह

ले गया हमसे विदा है ,

बंद मुट्ठी लिए बारह

दे रहा हमको सदा है ……..

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