सरस्वती वंदना

स्निग्ध धवल वस्त्रावृत, कर तुम्हारे वीणा मंडित ,

हो समग्र ज्ञान पुंजित, अज्ञान  करती हो खंडित |

नमन  तुम्हें   जगत्धात्री , शारदे  माँ  विद्यादात्री,

ज्योतिर्मय प्राण कर दो, अभय वर दो हे! विधात्री |

अतुल अक्षय ज्ञान राशि  देती माँ समग्र जन को,

बाध्यता है सुगम बनती, प्रेरणा  देती हो मन को |

सर्वविद्या दायिनी  हो, ज्ञान  चक्षु ज्योति हो तुम,

अज्ञता को दूर करती, उज्जवला प्रद्योति हो  तुम |

संतति  माँ  भारती  के, नमन  तेरा  हम हैं करते ,

कृपा  करना  माँ  सरस्वती, वंदना  तेरी  हैं करते ||

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2 टिप्पणियाँ “सरस्वती वंदना” पर

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