प्रार्थना

हे दयामय !ज्ञान उदगम ,जीव के आधार तुम ,

रचयिता हो इस जगत के ,पालते संसार तुम |

गुणातीत अगम्य अविरल ,समय के हो सार तुम ,

नियंता हो लोक त्रय के ,जीव तारणहार तुम |

हो अलौकिक सत्य शाश्वत ,सृष्टि शिल्पकार तुम ,

प्राण में तुम रंग भरते ,ऐसे चित्रकार तुम |

तत्व को आकार देते ,पर हो निराकार तुम ,

दिव्यांश तेरी कृपा के ,करो प्रभु स्वीकार तुम || 

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3 टिप्पणियाँ “प्रार्थना” पर

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