क्यों भटका करता यायावर

क्यों भटका करता यायावर ?यायावर

बाधाऐं  आती  हैं  पथ  पर, पग  को  डगमग  न  होने  दो

आशा की ज्योत न बुझ पाए, इच्छाओं  को  मत रोने  दो |

अंतर की उष्मा संचित कर,पिघला सकते हो तुम पत्थर

खुद को खो कर जो पाता है,युग उसका ही गुण  गाता है |

एकाग्रचित्त कर के जो ध्यान, कर्मठता  का कर यशोगान

संधान लक्ष्य  का करते जो  ,जग  से अभिनंदन पाते वो |

खिलता है पूर्ण कमल दल जब,मिलती है उसको धूप प्रखर

संघर्ष अनल  में तप कर ही, प्रतिभा पाती यश कीर्ति अमर |

सपनों  को  देने  मूर्त  रूप,  है  शिलाखंड  सहता   प्रहार

प्रतिकूल समय की आंधी से,लड़ कर ही पाते विजय हार |

गिर कर उठना ,उठ कर गिरना ,जब बचपन हमें सिखाता है

जीवन पथ पर ठोकर खा कर , मानव  क्यों  धैर्य  गंवाता  है ?

क्रंदन करना कायरता है, उठ  कर  जयघोष करो अभी

षड़यंत्र समय कितना कर ले,पौरुष से जीता नहीं कभी |

पांडवों  ने पानी फेर दिया ,शकुनी की सारी चालों पर

क्यों भटका करता  यायावर ,क्यों भटका……….

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4 टिप्पणियाँ “क्यों भटका करता यायावर” पर

    • राजेन्द्र जी आपके उत्साह्वर्धक मंतव्य के लिए कोटि कोटि धन्यवाद |
      आशा है भविष्य में भी अन्यान्य रचनाओं पर आप अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराते रहेंगें |
      धन्यवाद

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