शीत ऋतू

शीत ऋतू ने ली अंगडाई

याद आ रहा अपना गांव

सिह्काती थी हवा कान को

शाम ढले तारों की छाँव

बांध मुरैठा बैठा करते

फूस की जलती एक अलाव

शकरकंद औ आलू ला कर

धुंए राख के बीच लिटा कर

जलती अंगुली ,आँख को मलते

सोंधी खुसबू साँस में भरते

कथा कहानी किस्से गढ़ते

तपती तालू जीभ मचलती

स्वाद न वैसा कोई ठांव

शीत ऋतू ने ली अंगडाई

याद आ रहा अपना गांव

गिरती ओस लरजती ताने

न उठने के कई बहाने

बंशी काका,बिरजू भाई

कलुआ तेली केसो नाई

कभी तापते हाथ फैलाये

कभी सेंकते अपना पाँव

शीत ऋतू ने ली अंगडाई

याद आ रहा अपना गांव

Advertisements
diwyansh द्वारा कविता में प्रकाशित किया गया

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s