प्रकृति का श्रृंगार आज मन को भा गया
खेतों में पसरी आभा है सरसों के फूल की
मादक सी ये सुगंध है बागों के धूल की
पौधों पर फूटने लगी हैं कोपलें
कुहूकने लगीं हैं अब तो कोकिलें
वृक्षों ने भी धारण किया है आवरण नया
सृष्टि पर यौवन का है सौंदर्य छा गया
फूलों ने झूम चूम लिया तितलियों का मुख
भंवरा भी अपना राग है सुना गया
हर्षित हुआ हर मन पर आनंद छा गया
वसंत आ गया है लो वसंत आ गया ……..
